اسہِ مُتعلِق

بھارتوانی : زانٛکٲری ہِنٛدوستٲنۍ زبانن منٛز

ہِنٛدوستانس چھےٚ قٔدیٖم رٮ۪وایت علِم پٲدٕ کرنُک تہٕ پھۄلاونُک ؤسُنٛدرایہِ( ماجہِ زٔمیٖن) ہٕنٛزِ بہبوٗدی خٲطرٕ۔ تہزیٖبُک یُن پٔتۍمیو واریاہو صٔدیو پٮ۪ٹھٕ چُھ اثرانداز سپدان سُہ نظریہٕ زٕ أسۍ کِتھٕ چھِ وِچھان اتھ قٔدیٖم رٮ۪وایٔژ۔ تَوٕ کِنٛۍ چھےٚ ضروٗرت زانٛکٲری تہٕ زبان رٔژھراونٕچ یتھ ڈِجٹل اِنٛڈیاہِکِس دورس منٛز

بھارتوانی پرٛوجکٹ (بی وی پی) زانٛکٲری ہُنٛد آغاز یی وزارت فروغ اِنسٲنی وسٲیِل، حکوٗمت ہِنٛدوستان دٔسۍ لانٛچ کرنہٕ۔ ییٚمہِ پرٛوجکٹُک مقصد چُھ اَکھ ژھارُن لایق زانٛکٲری خزانہٕ بناوُن سارنٕے  ہِنٛدوستٲنۍ زبانن منٛز تہٕ سارنٕے زبانن خٲطرٕ ملٹٕمیٖڈیا (مَتن، آڈیو، ویٖڈیو، شکلہٕ) فارمیٛٹس منٛز آنلایِن پورٹل دٔسۍ۔ بھارتوانی پٮ۪ٹھ آسہِ سارنٕے سماجکٮ۪ن ورگن رسٲیی۔ پرٛوجکٹہٕ یی  سٮ۪نٛٹرٛل اِنسٹِٹیوٗٹ آف لٮ۪نٛگویج میسوٗروٗ کرناٹک دٔسۍ نٲفِز کرنہٕ۔ پورٹل دی کُشادٕ زانٛکٲری کاپی رایٹس تحت روٗرِتھ (اٮ۪کٹ ۲٠۱۲) پڑایہِ ہِنٛدِ مقصد خٲطرٕ۔

دِیہِ موٗجوٗدٕ زانٛکٲری یۄسہٕ گۄڈٔے آسہِ بناونہٕ آمٕژ کُنہِ سرکٲرۍ یا عوٲمی فنٛڈ دار اِدارو دٔسۍ ہِنٛدوستانس منٛز،تہٕ یی عوامس خٲطرٕ دٔستِیاب تھاونہٕ تہٕ دِنۍ ترتیٖب مضبوٗط، تامٕلی، یوٗزر فرٛنٛڈلی وٮ۪ب ٹوٗل چُھ بھارتوانی پرٛوجکٹٕچ اَہم کٲم۔ پرٛوجکٹٕچ رہنُمٲیی یی نیٛشٕنل اٮ۪ڈویزٔری کٔمیٖٹی تہٕ تکنیٖکی اٮ۪ڈویزٔری کٔمیٖٹی تہٕ ایٚمہٕ علاوٕ لینٛگویج اٮ۪ڈٕٹوریل کٔمیٖٹی دٔسۍ کرنہٕ یۄس سارنٕے زبانن خٲطرٕ چھِ۔ اٮ۪م اٮ۪چ آر ڈیٖیس چُھ زانٛکٲری ترتیٖب دِنس منٛز اکھ اہم کردار، تہٕ یِم شِخصٕس یتھ بُلنٛد پرٛوجکٹس منٛز چھِ، تِم چھِ بٔڑِس پٔیمانس منٛز زانٛکٲری بٲگرانس منٛز مدد کَران

بھارتوانی چھاپہِ یِمو اَہم حِصو منٛزٕ مواد

۱ پاٹیہٕ پُستک کوش: مَتن کِتاب

۲ گیان کوش: زانٛکٲری مواد

۳ شبد کوش: لۄغت

۴ باشا کوش: زبان ہٮ۪چھناوٕنۍ

۵ سوٗچنا پرٛدیوگِتا کوش: آے ٹی ٹوٗل ( ٹی ڈی آے اٮ۪لس سۭتۍ لِنٛک کٔرِتھ)

۶ بہوٗمادیم کوش: ملٹٕمیٖڈیا

ؤلِو دٔریافت کٔرِو زانٛکٲری سانٮ۪ن زبانن منٛز۔ ؤلِو کٔرِو سٲنۍ زبان استعمال ؤسعی سوٚتھرِس پٮ۪ٹھ سارنٕے ڈِجٹل بُنیٲز پٮ۪ٹھ تہٕ ہٲوِو پنٛنہٕ مالدار تہزیٖبٕچ موجوٗدگی دُنیٲوی سوٚتھرس پٮ۪ٹھ

भारतवाणी : भारतीय भाषाओं द्वारा ज्ञान

भारत में ज्ञान के निर्माण और उसको बाँटने की पुरानी परंपरा है जो मानव जाति के कल्याण के लिए है। विगत अनेक शताब्दियों के दौरान बाहरी सभ्यताओं के आगमन ने इस प्राचीन परंपरा के प्रति हमारे दृष्टिकोण को प्रभावित किया है। ‘डिजिटल भारत’ के इस युग में अपने इस ज्ञान और अपनी भाषाओं को संरक्षित करने की महती आवश्यकता है।

इस परिप्रेक्ष्य में मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा भारतवाणी परियोजना की शुरुआत की गई है जो ज्ञान के क्षेत्र में एक अनूठी पहल है। इस परियोजना का लक्ष्य एक ऑनलाइन पोर्टल के ज़रिए लगभग सभी भारतीय भाषाओं में और उनके बारे में मल्टीमीडिया प्रारूप (पाठ, श्रव्य, दृश्य, चित्रांकित रूप) में ज्ञान का ऐसा भंडार बनाना है जिसमें से मनचाही सूचना ढूँढकर निकाली जा सके।

यह भारतवाणी पोर्टल समाज के हर तबके की पहुँच के भीतर होगा। इसका क्रियान्वयन भारतीय भाषा संस्थान, मैसूरु, कर्नाटक के द्वारा किया जा रहा है। इस पोर्टल पर कॉपीराइट (संसोधित) कानून, 2012 की ‘उचित प्रयोग’ से संबंधित धाराओं के अंतर्गत शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए मुक्त ज्ञान सामग्री उपलब्ध करायी जा रही है।

एक सबल, अंतःक्रियात्मक और उपयोग में आसान वेब उपकरण के जरिए देश भर के विभिन्न सरकारी/निजी संस्थानों द्वारा तैयार ज्ञान सामग्री को इकट्ठा करके उसे सार्वजनिक उपयोग के लिए उपलब्ध कराना भारतवाणी परियोजना का प्रमुख कार्यक्षेत्र है। इस परियोजना का मार्गदर्शन एक राष्ट्रीय सलाहकार समिति और एक तकनीकी सलाहकार समिति करेगी और इनके अतिरिक्त प्रत्येक भाषा के लिए अलग-अलग संपादकीय समितियाँ भी होंगी। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ज्ञान के क्षेत्र में कार्यरत संस्थाओं और व्यक्तियों से इस महत्वाकांक्षी परियोजना में सक्रिय सहभागिता की अपील करता है जो ज्ञान के आदान-प्रदान के एक बड़े सामाजिक आंदोलन में परिणत हो पाएगा।

भारतवाणी परियोजना के अंतर्गत निम्नलिखित प्रमुख क्षेत्रों में सामग्री का प्रकाशन किया जाएगा-

  1. पाठ्य पुस्तक कोश: भाषानुसार विभिन्न विषयों के पाठ्य पुस्तकों का संचय
  2. ज्ञान कोश : विभिन्न भाषाओं से संबंधित विश्वकोशों का संचय (डिजिटलीकरण की प्रक्रिया जारी)
  3. शब्द कोश : विभिन्न क्षेत्रों से संबंधित एकभाषी, द्विभाषी एवं बहुभाषी कोशों का संचय
  4. भाषा कोश : भाषा अधिगम या उससे संबंधित पुस्तकों का संचय
  5. सूचना प्रौद्योगिकी कोश : टीडीआइएल द्वारा विकसित विभिन्न भाषाओं से संबंधित सॉफ्टवेयर के लिंक
  6. बहुमाध्यम कोश : विभिन्न भाषाओं से संबंधित श्रव्य एवं दृश्य सामग्री का संचय

आइए! अपनी भाषाओं में हम ज्ञान की खोज करें। सभी डिजिटल मंचों पर अपनी भाषा का विस्तृत उपयोग करें और संपूर्ण विश्व को अपनी समृद्ध विरासत का अनुभव कराएँ।

Bharatavani: Knowledge through Indian languages

India has a hoary tradition of creating and sharing knowledge for the welfare of the mankind. The advent of civilisation over the past several centuries impacted the way we looked at this ancient tradition. There is an urgent need to preserve the knowledge and our languages in the era of Digital India.

In this context, the Bharatavani Project (BvP), a knowledge initiative is launched by the Ministry of Human Resource Development (MHRD), Government of India. This Project aims to build a searchable knowledge repository in and about all the languages in India in multimedia (text, audio, video, images) formats through an online portal. The Bharatavani Portal will be accessible to all sections of society. The Project is being implemented by the Central Institute of Indian Languages, Mysuru, Karnataka. The Portal offers open knowledge under fair usage clauses of The Copyright (Amendment) Act, 2012, for educational purposes.

Providing available knowledge already created by the Government and publicly funded institutions all over India, and putting it across for the public usage, by deploying robust, interactive, user friendly web tools will be the main thrust of the Bharatavani Project. The Project will be guided by a National Advisory Committee and a Technology Advisory Committee, besides Language Editorial Committees in each of the languages. The MHRD seeks active participation of the knowledge organisations, individuals in this ambitious project resulting in a massive social movement of knowledge sharing.

The Bharatavani Portal would publish the content in the following main sections:

1. PaaThyapustaka Kosha: Textbooks
2. Jnana Kosha : Knowledge base (Digitisation underway)
3. Shabda Kosha: Dictionaries
4. Bhasha Kosha : Language learning
5. Suchanaa Praudyogikii Kosha : IT tools (Linked to TDIL)
6. Bahumaadhyama Kosha: Multimedia

Come and explore the knowledge in our languages. Let us use our languages extensively in all digital platforms and make the presence of our rich heritage felt all over the world.

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